Friday, September 5, 2014

शिक्षक दिवस

सभी मित्रों एवं शुभेच्छुओं को शिक्षक दिवस की ढेर सारी बधाइयाँ.

प्रथम शिक्षक कौन है? माता, पिता या दोनों. शायद दोनों ही.  लेकिन मेरी नजर में शायद माता ही पहली शिक्षक है.  पहला शब्द जब भी बोला होऊंगा, माता के प्रेरणा से ही. हाथ पकड़ के चलाना भी तो माता ने ही शुरू किया होगा. दादा-दादी का वैसा सान्निध्य तो प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन काका-काकी, चाचा-चाची तो थे ही, जिनकी भूमिका को हम कभी नकार नहीं सकते अपने जीवन में, एक शिक्षक के तौर पर.

समाज के ढेर सारे शुभचिंतकों ने अपने अमूल्य समय देकर मेरे व्यक्तित्व के निर्माण करने में शिक्षक की भूमिका निभाई. श्रेष्ठों में सरल भाय, फत्रिंग भैया, हरे काका, जगदीश झा (मेरे  मौसा), राधा कान्त मास्टर, इत्यादि. शिक्षकों में स्वर्गीय गुणी बाबु, काली बाबु, मधुकर जी, गुरु जी (मध्य विद्यालय चैनपुर), सदाशिव बाबु, शम्भू बाबु, कृष्णदेव बाबु, बहादुर बाबु, योगेन्द्र बाबु (उच्च विद्यालय बघवा ) के योगदान को भी कभी भुला पाना मुश्किल होगा. संक्षिप्त समय के लिए कमल बाबु का भी सान्निध्य मिला था, जिसका सुखद लाभ प्राप्त हुआ. मित्र में भी ऐसे ढेरों हैं, जिनसे समय के विभिन्न मोड़ पर शिक्षित हुआ. कुछ का नाम लेकर मैं किसी अन्य मित्रों के प्रभाव को कम करना नहीं चाहता हूँ.  आप सबों ने मुझे निर्मित करने में बड़ा योगदान दिया, अपना विश्वास जताया, आप सबको शत-शत नमन.

 लेकिन समय तो सबसे बड़ा शिक्षक है सब के लिए. जीवन जीने का तरीका तो समय ही बताता है. परिस्थितियों से मुकाबला करना समय ही सिखाता है, शिक्षा का प्रतिदान करना भी समय ही सिखाता है. अतः हे समय, हे मेरे सभी शिक्षक, आप सबों को शिक्षक दिवस की ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ.


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