श्री सत्यम ठाकुर, पिता श्री प्रदीप ठाकुर, एवं स्व. जय नारायण ठाकुर के पौत्र, २०१६ में आयोजित सिविल सर्विस परीक्षा २०१६ में २१८ रैंक आनि चैनपुर एवं सम्पूर्ण मिथिला के गौरवान्वित केलेन. BIT मेसरा से बी.टेक केलक उपरांत सत्यम बैंक के प्रोबेशनरी ऑफिसर के नौकरी के छोडि सिविल सर्विस के तैयारी में लागि गेलाह आ अपन आ सबहक विश्वास के बना के राखैत एहि बेर सफल भेलाह. हुनका भारतीय वित्त सेवा भेटल छैन. शायद अगिला बेर ओ फेर आईएस के लेल कोशिस करता. हम चैनपुर के दिस से हुनका एहि सफलता के लेल अशेष बधाई देत छियैन एवं भविष्य के लेल शुभकामना सेहो. आशा ऐछ जे हुनकर इ सफलता कतेको प्रतियोगी के उत्प्रेरित करतय. एक बेर पुनः बधाई सत्यम के.
all chainpurians are welcome on this blog. apne sab aau, baisu a gap sap karu apna chainpur ke vishay mein.
Thursday, June 1, 2017
Thursday, April 27, 2017
पंडित मधुकांत झा मधुकर- श्रद्धांजलि
२६.४.२०१७ के १२ बजे दिन हिंदी, संस्कृत, मैथिली के उद्भट विद्वान, आदर्श शिक्षक, बिषय कीर्तन के महारथी,एवं महान शिव-शिवा भक्त पंडित मधुकांत झा "मधुकर" अपन नश्वर शरीर त्यागि के नीलकंठ धाम के लेल प्रस्थान केलैथ.
मिथिलाक दोसर विद्यापति के रूप मे चर्चित स्व० मधुकर बाबा सहरसा जिलाक चैनपुर ग्रामक निवासी छलथि। स्व० मधुकर जी एकटा अप्रितम शिव-शिवा के भक्त और संगहि संस्कृत, हिंदी आ मैथिली भाषा साहित्य के श्रष्टा के रूप मे मानल-जानल जाइत छथि। श्री मधुकांत झा "मधुकर" जी अपन पिता स्वरूप लाल झा और माता छेदनी देवी के निरंतर प्रयास सँ शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कऽ शिक्षक पद के बखूबी दायित्व निर्वहन केलनि। अपन शिक्षण काल में मधुकर बाबा कतेक छात्र सब के अपन विद्वता एवं अभिभावकत्व से अनुग्रहीत एवं प्रभावित केलखिन. शिक्षक के रूप में बेसी दिन ओ चैनपुर स्कूल मे ही रहलैथ. अपन शुरुआती दिन मे पुराण के वाचन एवं बिषय कीर्तन प्रभावशाली ढंग से केलखिन. हुनकर प्रवचन गंभीर एवं उत्प्रेक होइत छल. कैक बेर हमहू हुनका प्रवचन के साक्षी भेल छि.
अपन शिक्षण पेशा के संगे लेखन कार्य मे सेहो महारत हासिल केलनि। १९६८ सँ १९७४ धरि मधुकर बाबा आकाशवाणी पटना मे योगदान दऽ सांस्कृतिक प्रवचन के माध्यम सँ समाज के नवचेतना प्रदान केलथि आ राज्य स्तर पर अपना के स्थापित केलैथ। मैथिलि भक्ति संगीत में एकटा ओ पैघ हस्ताक्षर छैथ. हुनक प्रकाशित रचना मे समाज सौगात नवीन नचारी अभिनव नचारी, मधुकर नचारी, नीलकंठ मधुकर पदावली समलित अछि। ओहि प्रकार नारद भक्ति सूत्र केर मैथिली अनुवाद सेहो कऽ मिथिला के नव दिशा आ ऊंचाई प्रदान केलनि। हुनकर किछ कृति एखनो अप्रकाशित छै, जाकर लेल हमरा सब के प्रयास करबाक बेगरता छै संगहि ओहि कृति सब के डिजिटल रूप में राखे के प्रयास सेहो आवश्यक.
मधुकर बाबा १९७१ मे नीलकंठ कमरथुआ संघ के स्थापना केलनि जे परम्परा आयो चली रहल अछि। ताहिके अंतर्गत भादो मास मे हजारों कमरथुआ हरे-राम हरे राम..हरे-कृष्ण आ सदाशिव केर कीर्तन करेत बैद्यनाथ धाम जायत छथि।
मधुकर बाबा मिथिला मे अध्यात्म आ समाजसेवा के नव आयाम देलनि।
मिथिलाक दोसर विद्यापति के रूप मे चर्चित स्व० मधुकर बाबा सहरसा जिलाक चैनपुर ग्रामक निवासी छलथि। स्व० मधुकर जी एकटा अप्रितम शिव-शिवा के भक्त और संगहि संस्कृत, हिंदी आ मैथिली भाषा साहित्य के श्रष्टा के रूप मे मानल-जानल जाइत छथि। श्री मधुकांत झा "मधुकर" जी अपन पिता स्वरूप लाल झा और माता छेदनी देवी के निरंतर प्रयास सँ शिक्षा-दीक्षा प्राप्त कऽ शिक्षक पद के बखूबी दायित्व निर्वहन केलनि। अपन शिक्षण काल में मधुकर बाबा कतेक छात्र सब के अपन विद्वता एवं अभिभावकत्व से अनुग्रहीत एवं प्रभावित केलखिन. शिक्षक के रूप में बेसी दिन ओ चैनपुर स्कूल मे ही रहलैथ. अपन शुरुआती दिन मे पुराण के वाचन एवं बिषय कीर्तन प्रभावशाली ढंग से केलखिन. हुनकर प्रवचन गंभीर एवं उत्प्रेक होइत छल. कैक बेर हमहू हुनका प्रवचन के साक्षी भेल छि.
अपन शिक्षण पेशा के संगे लेखन कार्य मे सेहो महारत हासिल केलनि। १९६८ सँ १९७४ धरि मधुकर बाबा आकाशवाणी पटना मे योगदान दऽ सांस्कृतिक प्रवचन के माध्यम सँ समाज के नवचेतना प्रदान केलथि आ राज्य स्तर पर अपना के स्थापित केलैथ। मैथिलि भक्ति संगीत में एकटा ओ पैघ हस्ताक्षर छैथ. हुनक प्रकाशित रचना मे समाज सौगात नवीन नचारी अभिनव नचारी, मधुकर नचारी, नीलकंठ मधुकर पदावली समलित अछि। ओहि प्रकार नारद भक्ति सूत्र केर मैथिली अनुवाद सेहो कऽ मिथिला के नव दिशा आ ऊंचाई प्रदान केलनि। हुनकर किछ कृति एखनो अप्रकाशित छै, जाकर लेल हमरा सब के प्रयास करबाक बेगरता छै संगहि ओहि कृति सब के डिजिटल रूप में राखे के प्रयास सेहो आवश्यक.
मधुकर बाबा १९७१ मे नीलकंठ कमरथुआ संघ के स्थापना केलनि जे परम्परा आयो चली रहल अछि। ताहिके अंतर्गत भादो मास मे हजारों कमरथुआ हरे-राम हरे राम..हरे-कृष्ण आ सदाशिव केर कीर्तन करेत बैद्यनाथ धाम जायत छथि।
मधुकर बाबा मिथिला मे अध्यात्म आ समाजसेवा के नव आयाम देलनि।
डिम डिम डमरू बजाबय छै हमर जोगिया.., हम आनंदे रहबय हौ..., अहो शिव महेश्वर..., बसहा चढ़ल शिव शंकर परम सुहावन हे ...., आबहु त आबS महेश आबS उगना के भेष में..., उमापति आब करू जनि देरी..., भोला कठोर किये भेलिये यौ..., कमरथुआ हौ भाय, बाबा के सुरतिया मन में राखिहS..., नीलकंठ बाबा बड उदार कमरथुआ ......, हमरा केवल एक भरोसा नीलकंठ दानी के..., ककरा कहब हम, कतय गेला भोला बम..., हे माय गमाय देलों सब दिन घूमि आय शरण तकि आयल छि..., जगत जननी कहू कहिया जगत कल्याण करबे माँ..., कोन कलम से लिखलS हौ बाबा हमरा सबहक माथ...,भोला के महिमा अपार रे सिनेहिया..., हे जगतारिणी वीणा पुस्तक धारिणी विनय सुनाबय छि..... इत्यादि कालजयी नचारी एवं देवी गीत के रचयिता छैथ.
बाबा के अवसान हमरा सबहक लेल अपूरणीय क्षति छिये.
आय हिनक निधन सँ चैनपुर सहित समूचा मिथिलांचल शोकाकुल ऐछ.Thursday, February 9, 2017
sagar kumar jha got first rank in assistant commandant exam 2016
Son of chainpur, sagar kumar, s/o mihir kumar jha 'bhagwanji', got #AIR-1 in Central Armed Force Exam (AC) 2016 conducted by Union Public Service Commission. Academically, he is always excellent. In 10th he got 96% and in 12th 93%. After clearing JEE, he did B.Tech. from IIT, BHU in computer science. After graduating from IIT BHU, he took a job in Samsung Research India as a software developer and later chose to prepare for Civil Service exam. At present, he is waiting for result of civil service exam(Main). Best of luck to him.
update: He secure #AIR-13 in Civil Service Exam 2017 and opted for IPS.
Perhaps, he is the first person of chainpur who secured first rank in all india competitive exam.
HEARTLY CONGRATULATION TO SAGAR.
update: He secure #AIR-13 in Civil Service Exam 2017 and opted for IPS.
Perhaps, he is the first person of chainpur who secured first rank in all india competitive exam.
HEARTLY CONGRATULATION TO SAGAR.
Wednesday, November 16, 2016
चैनपुर के मेधावी बेटी रूपम कुमारी
चैनपुर केँ रूपम कुमारी कविता लेखनी म' पूरा बिहार म' प्रथम स्थान प्राप्त केलीह
बहुमुखी प्रतिभा केँ धनी रूपम कुमारी, पिता- स्व. संतोष मिश्र, बाबा- स्व. विश्वनाथ मिश्र, ग्राम चैनपुर, जिला - सहरसा क' बिहार शिक्षा परियोजना द्वारा आयोजित शिक्षा दिवस 2016 केँ कविता लेखनी म' पूरा बिहार म' प्रथम स्थान प्राप्त भेलन्हि।
रूपम शुरूवे सँ मेधावी छलीह, ओ पढाई म' अव्वल होयबाक संगे - संग रचनात्मक काज म' सेहो सदिखन आगू रहैत छली। हुनकर प्रतिभा क' निखारबा म' नीलकंठ बालिका मध्य विद्यालय चैनपुर केर प्रधानाध्यापक श्री संतोष ठाकुर जीक बहुत योगदान छलैन्ह। श्री संतोष ठाकुर जी गुरू केर संगे - संग अभिभावक केर फर्ज सेहो निभेलन्हि। श्री निरंजन ठाकुर (अमेरिका) सेहो रूपम क' लक्ष्य तक पहुँचबा म' पूरा सहयोग केलन्हि।
चैनपुर गामक नाम राज्य स्तर पर उँच करबाक लेल समस्त ग्राम वासी आय अपना आप क' गौरवान्वित महसूस करैत छैथ। पूरा ग्राम वासी क' रूपम कुमारी एहेन बेटी पर नाज छैन्ह। आय रूपम कुमारी देखा देली कि बेटी सेहो दुनियाँक संग डेग सँ डेग मिला छैल सकैत छथि।
चैनपुर धरती रत्नगर्भा अछि, एहिठाम एक सँ एक इतिहास रचनिहार जन्म लेलाह, ओहि कड़ी क' बहुत रास असुविधा केँ बादो रूपम कुमारी आगू बढ़ेली जाहि सँ पूरा ग्राम वासी बहुत खुश छैथ।
रूपम शुरूवे सँ मेधावी छलीह, ओ पढाई म' अव्वल होयबाक संगे - संग रचनात्मक काज म' सेहो सदिखन आगू रहैत छली। हुनकर प्रतिभा क' निखारबा म' नीलकंठ बालिका मध्य विद्यालय चैनपुर केर प्रधानाध्यापक श्री संतोष ठाकुर जीक बहुत योगदान छलैन्ह। श्री संतोष ठाकुर जी गुरू केर संगे - संग अभिभावक केर फर्ज सेहो निभेलन्हि। श्री निरंजन ठाकुर (अमेरिका) सेहो रूपम क' लक्ष्य तक पहुँचबा म' पूरा सहयोग केलन्हि।
चैनपुर गामक नाम राज्य स्तर पर उँच करबाक लेल समस्त ग्राम वासी आय अपना आप क' गौरवान्वित महसूस करैत छैथ। पूरा ग्राम वासी क' रूपम कुमारी एहेन बेटी पर नाज छैन्ह। आय रूपम कुमारी देखा देली कि बेटी सेहो दुनियाँक संग डेग सँ डेग मिला छैल सकैत छथि।
चैनपुर धरती रत्नगर्भा अछि, एहिठाम एक सँ एक इतिहास रचनिहार जन्म लेलाह, ओहि कड़ी क' बहुत रास असुविधा केँ बादो रूपम कुमारी आगू बढ़ेली जाहि सँ पूरा ग्राम वासी बहुत खुश छैथ।
काली पूजा २०१६
अय बेर तीन बरख के बाद काली पूजा में गाम गेलौं. गाम में पैर रखिते बुझायल जे स्वर्ग में आबि गेलहु. ओना त गाम के यात्रा सब बेर सुख कारी होयत ऐछ, मुदा एहि बेर त आर बढ़िया रहल. गाम गेलाक बाद त जीवन एकदम निश्चिन्त एवं सरल भ जायत ऐछ.
एहि बेर के काली पूजा चारि दिन के छल. गाम २८ तारीख के पहुँचलौं. काली माय के जन्म से एक दिन पहिने. जन्मदिन २९ तारीख के तै सांझ होयत-होयत गाम के सब माय बहिन आ बेटी सब (चारि-पांच बरख के सेहो) माय काली के सांझ देबाक लेल दीप लेने चलि देलीह. गाम के माहौल भक्ति से सराबोर छल. बुझि पडैत छल जे कुनु देव भूमि में छी. हांजक हांज लोक, छोर त छुटिते नै छल. आजुक दिन पुरनका काली घर में मैया के जागरण के आयोजन छल ते दोसर दिस नवकि काली घर में आल्हा-उदल प्रसंग के बढ़िया आयोजन छल. लोक कथा के आयोजन बड्ड सफल रहल.
दोसर दिन उका-पाती भेल. आन गाम के त हमरा अंदाज नहि ईच्छ, मुदा इ हम दावा क सके छि जे उका-पाती के उपरांत अपन गाम के जे दृश्य रहैत ऐछ, ओ भारिसक्के कोनो ठाम होइत हैत. दुनु दिश के काली माय के आशीर्वाद लेबाक लेल पूरा गाम सड़के पर रहैत ऐछ. संगहि श्रेष्ठ जन के आशीर्वाद लेल सेहो सम्पूर्ण गाम गतिशील छल. नव-पुराण लोक से भेंट घांट एहि अवसर के आर यादगार बना देत ऐछ. आय सेहो पुरनका काली घर में जागरण के आयोजन छल आ नवकि काली घर में जल्दी में आयोजन करल गेल नाटक आ सांस्कृतिक कार्यक्रम भेल.
नवकि काली घर में आयोजित मेला एहि बेर हाय -टेक रहल, संगहि मेला विस्तृत रहल. काली पोखैर के जीर्णोद्धार से एहि आयोजन में सुगमता आयल. सम्पूर्ण मनिहारी वाला दोकान सब काली पोखैर के पाढ़ पर लगाओल गेल, एही तरहे, एनी दोकान-दौरी के लेल पर्याप्त जगह बनल. मेला में CCTV के व्यवस्था छल आ WI-FI सेहो. पार्किंग के समुचित व्यवस्था छल आ मेला परिसर में गाड़ी-घोड़ा के आवाजाही के कुशलता पूर्वक नियंत्रित कैल गेल. नवकि काली स्थान के मेला कमिटी के अध्यक्ष भगवान् जी अपन कुशल नेतृत्व में युवा वर्गक सहयोग से मेला के सुव्यवस्थित रहल.
एहि बेर एकटा महत्वपूर्ण आयोजन सेहो भेल, ओ छल स्व. कलिकांत ठाकुर स्मृति छात्रवृत्ति समारोह. एहि में स्व. कालीकान्त ठाकुर के पौत्र एवं श्री राम चन्द्र ठाकुर के पुत्र श्री निरंजन ठाकुर द्वारा मैट्रिक के परीक्षा २०१६ में प्रथम तीन स्थान पर आबे वाला छात्र के प्रोत्साहन पुरस्कार देल गेल. इ आयोजन पुरनका काली स्थान के रंगमंच पर भेल. उपस्थित गणमान्य छलाह- श्री आर.एन.ठाकुर, श्री डी.एन.ठाकुर, श्री विक्रमादित्य खान, संजीव ठाकुर, सरोज कुमार मिश्र, संतोष कुमार ठाकुर 'ज्योतिषी जी', श्री राम चन्द्र ठाकुर, निरंजन ठाकुर, दीप नारायण ठाकुर, इत्यादि. समारोह के कुशलता पूर्वक सञ्चालन केलाह श्री प्रफुल्ल चन्द्र ठाकुर. एहि में प्रथम- अमन कुमार ठाकुर,, द्वितीय-विकास वैभव, एवं तृतीय स्थान- सोनू झा कें क्रमशः १००००, ७००० एवं ५००० रुपया के छात्रवृत्ति देल गेलेन. संगहि एकटा मेधावी छात्रा रूपम कुमारी कें ३००० रुपया के विशेष छात्रवृत्ति देल गेलैन. एहि इहो घोषणा भेल जे इ छात्रवृत्ति हर बरस देल जायत. संगहि रूपम कुमारी के प्रति मास १००० रूपया के छात्रवृत्ति हुनका छात्र जीवन भैर देल जायत. सम्पूर्ण गाम आ छात्र वर्ग निरंजन ठाकुर जी के आभारी छैथ. जतय एक दिश इ छात्र वर्ग के लेल प्रेरणा के स्रोत बनत, दोसर दिश आरो समर्थ लोक के सेहो आकर्षित करत जे गाम के शिक्षा के उन्नति के लेल आगाँ एताह. इहो आश्वासन भेटल जे एही दिशा में किछ प्लान आरो बनत, एहि बात के मंचासीन आर.एन.ठाकुर सेहो घोषणा केलैथ. चैनपुर के शिक्षा के इतिहास में इ आयोजन एकटा मील के पाथर साबित होयत.
जेना पहिनहु कहल जे मेला के आयोजन शानदार रहल आ शांतिपूर्ण सेहो. दुनु काली घर में आर्केस्ट्रा के आयोजन छल जे अपने गामे टा नहि अपितु आस-पास के गाम सबहक युवा के खूब आकर्षित केलक.
माय काली के प्रतिमा के विसर्जन ०१.११.१६ के भेल. अद्भुत, अलौकिक दृश्य के वर्णन करय में हम असमर्थ छि. जे देखलक, सैह महसूस केलक. लगभग १०००० से बेसी दर्शनार्थी माय के भसान के साक्षी बनल. मेला अपन उच्चतम बिंदु पर पहुँच गेल भसान के बेर में. बोले काली माय के जयकारा से पूरा क्षेत्र गुंजायमान भेल. अश्रुपूरित नेत्र से मैया के बिदाय कैल गेल.
अगिला दिन कुश्ती पारंपरिक तरीका से भेल आ मेला समाप्त भेल.
बहुत दिन के बाद एहेन आनंद भेटल गाम में. माय के कृपा रहते त फेर अगिला बेर मैया के दर्शन लेल पहुचब.
एक बेर फेर- बोले रे काली माय की जय.
एहि बेर के काली पूजा चारि दिन के छल. गाम २८ तारीख के पहुँचलौं. काली माय के जन्म से एक दिन पहिने. जन्मदिन २९ तारीख के तै सांझ होयत-होयत गाम के सब माय बहिन आ बेटी सब (चारि-पांच बरख के सेहो) माय काली के सांझ देबाक लेल दीप लेने चलि देलीह. गाम के माहौल भक्ति से सराबोर छल. बुझि पडैत छल जे कुनु देव भूमि में छी. हांजक हांज लोक, छोर त छुटिते नै छल. आजुक दिन पुरनका काली घर में मैया के जागरण के आयोजन छल ते दोसर दिस नवकि काली घर में आल्हा-उदल प्रसंग के बढ़िया आयोजन छल. लोक कथा के आयोजन बड्ड सफल रहल.
दोसर दिन उका-पाती भेल. आन गाम के त हमरा अंदाज नहि ईच्छ, मुदा इ हम दावा क सके छि जे उका-पाती के उपरांत अपन गाम के जे दृश्य रहैत ऐछ, ओ भारिसक्के कोनो ठाम होइत हैत. दुनु दिश के काली माय के आशीर्वाद लेबाक लेल पूरा गाम सड़के पर रहैत ऐछ. संगहि श्रेष्ठ जन के आशीर्वाद लेल सेहो सम्पूर्ण गाम गतिशील छल. नव-पुराण लोक से भेंट घांट एहि अवसर के आर यादगार बना देत ऐछ. आय सेहो पुरनका काली घर में जागरण के आयोजन छल आ नवकि काली घर में जल्दी में आयोजन करल गेल नाटक आ सांस्कृतिक कार्यक्रम भेल.
नवकि काली घर में आयोजित मेला एहि बेर हाय -टेक रहल, संगहि मेला विस्तृत रहल. काली पोखैर के जीर्णोद्धार से एहि आयोजन में सुगमता आयल. सम्पूर्ण मनिहारी वाला दोकान सब काली पोखैर के पाढ़ पर लगाओल गेल, एही तरहे, एनी दोकान-दौरी के लेल पर्याप्त जगह बनल. मेला में CCTV के व्यवस्था छल आ WI-FI सेहो. पार्किंग के समुचित व्यवस्था छल आ मेला परिसर में गाड़ी-घोड़ा के आवाजाही के कुशलता पूर्वक नियंत्रित कैल गेल. नवकि काली स्थान के मेला कमिटी के अध्यक्ष भगवान् जी अपन कुशल नेतृत्व में युवा वर्गक सहयोग से मेला के सुव्यवस्थित रहल.
एहि बेर एकटा महत्वपूर्ण आयोजन सेहो भेल, ओ छल स्व. कलिकांत ठाकुर स्मृति छात्रवृत्ति समारोह. एहि में स्व. कालीकान्त ठाकुर के पौत्र एवं श्री राम चन्द्र ठाकुर के पुत्र श्री निरंजन ठाकुर द्वारा मैट्रिक के परीक्षा २०१६ में प्रथम तीन स्थान पर आबे वाला छात्र के प्रोत्साहन पुरस्कार देल गेल. इ आयोजन पुरनका काली स्थान के रंगमंच पर भेल. उपस्थित गणमान्य छलाह- श्री आर.एन.ठाकुर, श्री डी.एन.ठाकुर, श्री विक्रमादित्य खान, संजीव ठाकुर, सरोज कुमार मिश्र, संतोष कुमार ठाकुर 'ज्योतिषी जी', श्री राम चन्द्र ठाकुर, निरंजन ठाकुर, दीप नारायण ठाकुर, इत्यादि. समारोह के कुशलता पूर्वक सञ्चालन केलाह श्री प्रफुल्ल चन्द्र ठाकुर. एहि में प्रथम- अमन कुमार ठाकुर,, द्वितीय-विकास वैभव, एवं तृतीय स्थान- सोनू झा कें क्रमशः १००००, ७००० एवं ५००० रुपया के छात्रवृत्ति देल गेलेन. संगहि एकटा मेधावी छात्रा रूपम कुमारी कें ३००० रुपया के विशेष छात्रवृत्ति देल गेलैन. एहि इहो घोषणा भेल जे इ छात्रवृत्ति हर बरस देल जायत. संगहि रूपम कुमारी के प्रति मास १००० रूपया के छात्रवृत्ति हुनका छात्र जीवन भैर देल जायत. सम्पूर्ण गाम आ छात्र वर्ग निरंजन ठाकुर जी के आभारी छैथ. जतय एक दिश इ छात्र वर्ग के लेल प्रेरणा के स्रोत बनत, दोसर दिश आरो समर्थ लोक के सेहो आकर्षित करत जे गाम के शिक्षा के उन्नति के लेल आगाँ एताह. इहो आश्वासन भेटल जे एही दिशा में किछ प्लान आरो बनत, एहि बात के मंचासीन आर.एन.ठाकुर सेहो घोषणा केलैथ. चैनपुर के शिक्षा के इतिहास में इ आयोजन एकटा मील के पाथर साबित होयत.
जेना पहिनहु कहल जे मेला के आयोजन शानदार रहल आ शांतिपूर्ण सेहो. दुनु काली घर में आर्केस्ट्रा के आयोजन छल जे अपने गामे टा नहि अपितु आस-पास के गाम सबहक युवा के खूब आकर्षित केलक.
माय काली के प्रतिमा के विसर्जन ०१.११.१६ के भेल. अद्भुत, अलौकिक दृश्य के वर्णन करय में हम असमर्थ छि. जे देखलक, सैह महसूस केलक. लगभग १०००० से बेसी दर्शनार्थी माय के भसान के साक्षी बनल. मेला अपन उच्चतम बिंदु पर पहुँच गेल भसान के बेर में. बोले काली माय के जयकारा से पूरा क्षेत्र गुंजायमान भेल. अश्रुपूरित नेत्र से मैया के बिदाय कैल गेल.
अगिला दिन कुश्ती पारंपरिक तरीका से भेल आ मेला समाप्त भेल.
बहुत दिन के बाद एहेन आनंद भेटल गाम में. माय के कृपा रहते त फेर अगिला बेर मैया के दर्शन लेल पहुचब.
एक बेर फेर- बोले रे काली माय की जय.
Saturday, November 14, 2015
काली पूजा-2015
आय काली पूजा के मेला कुश्ती के संग समाप्त भ गेल. अय बेर के काली पूजा के आयोजन किछ खास छल. चैनपुर उच्च विद्यालय के २००५ मेट्रिक बैच के युवा सब मिलि के १० नवम्बर के चैनपुर आइडल के आयोजन केने छल एकदम इंडियन आइडल के तर्ज पर. राज्य के विभिन्न जिला से लगभग १०० से बेसी प्रतियोगी भाग ललक. पहिलुक राउंड त १० अक्टूबर के हि भ गेल छल आ ओही से लगभग २० गोट प्रतिभागी ग्रैंड फिनाले लेल चुनल गेलाह. नवकि काली के रंगमंच पर १० नवम्बर के सम्पूर्ण चैनपुर,कहू ते सम्पूर्ण बिहार गवाह बनल एही आयोजन. मुख्य अतिथि छलाह- भाजपा के छातापुर से नव निर्वाचित विधायक श्री नीरज कुमार सिंह बबलू आ उभरैत समाज सेवी श्री चन्द्र कान्त झा 'टीपू'. निर्णायक मंडल के सदस्य रहैथ : मैथिलि के प्रसिद्ध गायिका श्रीमती रंजना झा, म्यूजिक डायरेक्टर सरोज सुमन, श्रीमती लक्ष्मी सिंह एवं श्री निरंजन ठाकुर (प्रख्यात तबला वादक). प्रतियोगिता बड्ड कठिन छल, आ कतेक राउंड के बाद पहिलुक स्थान पर एल्लाह श्री मंजीत काश्यप, दोसर स्थान रंजना मिश्र एवं तेसर स्थान साक्षी कुमारी. अपना तरहक इ आयोजन एहि परोपट्टा में पहिल छल. आयोजन बड्ड सफल रहल. एकर प्रमुख कर्ता धर्ता सब छैथ: उज्जवल ठाकुर, रोशन मिश्र, विद्यासागर, दिलकुश, नितीश आ ढेरिक उर्जावान युवा सब, जिनकर नाम से हमहू अवगत नहि छि. सब शंका के दूर करैत, मुश्किल पर विजय क क एहि आयोजन के अभूतपूर्व सफलता प्रदान केलैथ, एही लेल सब के साधुवाद. बड्ड इच्छा रहितो, किछ व्यक्तिगत कारण से एहि साक्षी नहि भ सकलहु, एकर अफ़सोस जीवन भैर रहत.
जानकारी के अनुसार, मेला शांति पूर्वक संपन्न भेल, माय काली समस्त गाम के शक्ति देथुन जाहि से की एहिना काली पूजा अनवरत ढंग से होयत रहे. एकटा बात के दुःख होयत ऐछ जे गाम में नाटक के सुदीर्घ परंपरा छल, शायद ओकर लोप भ रहल छै. शायद कारण इ भेल जे समय के अनुसार हम सब नव विधा आ पद्धिति नहि अपनेलहु नाटक के सन्दर्भ में. समस्त गाम के एही दिशा में ध्यान देबाक बेगरता छै. गाम के कतेक लोक छैथ जे एखनहु रंगमंच से जुरल छैथ आ आधुनिक पद्धिति से पुर्णतः अवगत छित, किछ सार्थक प्रयास करबाक चाही. एही उम्मीद के संग समस्त ग्रामीण के छठ के अग्रिम शुभकामना.
जानकारी के अनुसार, मेला शांति पूर्वक संपन्न भेल, माय काली समस्त गाम के शक्ति देथुन जाहि से की एहिना काली पूजा अनवरत ढंग से होयत रहे. एकटा बात के दुःख होयत ऐछ जे गाम में नाटक के सुदीर्घ परंपरा छल, शायद ओकर लोप भ रहल छै. शायद कारण इ भेल जे समय के अनुसार हम सब नव विधा आ पद्धिति नहि अपनेलहु नाटक के सन्दर्भ में. समस्त गाम के एही दिशा में ध्यान देबाक बेगरता छै. गाम के कतेक लोक छैथ जे एखनहु रंगमंच से जुरल छैथ आ आधुनिक पद्धिति से पुर्णतः अवगत छित, किछ सार्थक प्रयास करबाक चाही. एही उम्मीद के संग समस्त ग्रामीण के छठ के अग्रिम शुभकामना.
Friday, March 27, 2015
चैनपुर के बेटा के भेटल फिल्म फेयर पुरस्कार
ओना त चैनपुर के धरती कतेको रत्न के जन्म देलक आ सब अपन अपन क्षमता के अनुसार देश-विदेश में नाम रौशन केने छैथ. मुदा एहि साल किछ अभूतपूर्व भेल. चैनपुर के सुप्रसिद्ध डॉक्टर श्री बिनोद ठाकुर जी के पुत्र श्री तनुल ठाकुर जी के फिल्म फेयर पुरस्कार भेटल- श्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लेल. श्री तनुल इ पुरस्कार प्राप्त करय वला सबसे कम उम्र के आलोचक छैथ. अपन पिता के कर्मस्थली धनबाद में अपन प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त केला के उपरांत श्री तनुल मनिपाल विश्वविद्यालय एवं अमेरिका के एक यूनिवर्सिटी से विद्युत् इंजीनियरिंग के डिग्री प्राप्त केलैथ आ किछ दिन नौकरी सेहो. मुदा अपन पसंद आ जूनून के देखैत बढ़िया नौकरी छोडि देश आबि गेलाह आ फिल्म समालोचना के कार्य में लागि गेलाह. सफलता भेटलेन सेहो एतेक कम उम्र में. हम सब गर्वित छि हुनका उपलब्धि से. शुभकामना जे भविष्य में श्री तनुल खूब नाम करैथ . बाबा नीलकंठ एवं काली माय हुनका खूब शक्ति देथुन.
Friday, September 5, 2014
शिक्षक दिवस
सभी मित्रों एवं शुभेच्छुओं को शिक्षक दिवस की ढेर सारी बधाइयाँ.
प्रथम शिक्षक कौन है? माता, पिता या दोनों. शायद दोनों ही. लेकिन मेरी नजर में शायद माता ही पहली शिक्षक है. पहला शब्द जब भी बोला होऊंगा, माता के प्रेरणा से ही. हाथ पकड़ के चलाना भी तो माता ने ही शुरू किया होगा. दादा-दादी का वैसा सान्निध्य तो प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन काका-काकी, चाचा-चाची तो थे ही, जिनकी भूमिका को हम कभी नकार नहीं सकते अपने जीवन में, एक शिक्षक के तौर पर.
समाज के ढेर सारे शुभचिंतकों ने अपने अमूल्य समय देकर मेरे व्यक्तित्व के निर्माण करने में शिक्षक की भूमिका निभाई. श्रेष्ठों में सरल भाय, फत्रिंग भैया, हरे काका, जगदीश झा (मेरे मौसा), राधा कान्त मास्टर, इत्यादि. शिक्षकों में स्वर्गीय गुणी बाबु, काली बाबु, मधुकर जी, गुरु जी (मध्य विद्यालय चैनपुर), सदाशिव बाबु, शम्भू बाबु, कृष्णदेव बाबु, बहादुर बाबु, योगेन्द्र बाबु (उच्च विद्यालय बघवा ) के योगदान को भी कभी भुला पाना मुश्किल होगा. संक्षिप्त समय के लिए कमल बाबु का भी सान्निध्य मिला था, जिसका सुखद लाभ प्राप्त हुआ. मित्र में भी ऐसे ढेरों हैं, जिनसे समय के विभिन्न मोड़ पर शिक्षित हुआ. कुछ का नाम लेकर मैं किसी अन्य मित्रों के प्रभाव को कम करना नहीं चाहता हूँ. आप सबों ने मुझे निर्मित करने में बड़ा योगदान दिया, अपना विश्वास जताया, आप सबको शत-शत नमन.
लेकिन समय तो सबसे बड़ा शिक्षक है सब के लिए. जीवन जीने का तरीका तो समय ही बताता है. परिस्थितियों से मुकाबला करना समय ही सिखाता है, शिक्षा का प्रतिदान करना भी समय ही सिखाता है. अतः हे समय, हे मेरे सभी शिक्षक, आप सबों को शिक्षक दिवस की ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ.
प्रथम शिक्षक कौन है? माता, पिता या दोनों. शायद दोनों ही. लेकिन मेरी नजर में शायद माता ही पहली शिक्षक है. पहला शब्द जब भी बोला होऊंगा, माता के प्रेरणा से ही. हाथ पकड़ के चलाना भी तो माता ने ही शुरू किया होगा. दादा-दादी का वैसा सान्निध्य तो प्राप्त नहीं हुआ, लेकिन काका-काकी, चाचा-चाची तो थे ही, जिनकी भूमिका को हम कभी नकार नहीं सकते अपने जीवन में, एक शिक्षक के तौर पर.
समाज के ढेर सारे शुभचिंतकों ने अपने अमूल्य समय देकर मेरे व्यक्तित्व के निर्माण करने में शिक्षक की भूमिका निभाई. श्रेष्ठों में सरल भाय, फत्रिंग भैया, हरे काका, जगदीश झा (मेरे मौसा), राधा कान्त मास्टर, इत्यादि. शिक्षकों में स्वर्गीय गुणी बाबु, काली बाबु, मधुकर जी, गुरु जी (मध्य विद्यालय चैनपुर), सदाशिव बाबु, शम्भू बाबु, कृष्णदेव बाबु, बहादुर बाबु, योगेन्द्र बाबु (उच्च विद्यालय बघवा ) के योगदान को भी कभी भुला पाना मुश्किल होगा. संक्षिप्त समय के लिए कमल बाबु का भी सान्निध्य मिला था, जिसका सुखद लाभ प्राप्त हुआ. मित्र में भी ऐसे ढेरों हैं, जिनसे समय के विभिन्न मोड़ पर शिक्षित हुआ. कुछ का नाम लेकर मैं किसी अन्य मित्रों के प्रभाव को कम करना नहीं चाहता हूँ. आप सबों ने मुझे निर्मित करने में बड़ा योगदान दिया, अपना विश्वास जताया, आप सबको शत-शत नमन.
लेकिन समय तो सबसे बड़ा शिक्षक है सब के लिए. जीवन जीने का तरीका तो समय ही बताता है. परिस्थितियों से मुकाबला करना समय ही सिखाता है, शिक्षा का प्रतिदान करना भी समय ही सिखाता है. अतः हे समय, हे मेरे सभी शिक्षक, आप सबों को शिक्षक दिवस की ढेर सारी बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ.
Sunday, January 5, 2014
राम भाय - एक मित्र
४ जनवरी के दिन एकटा दुखद समचार देलक. हमर सबहक प्रिय, नंगोटीया संगी, राम भाय उर्फ़ रमानाथ ठाकुर, हमर सबहक संग छोडि देलाह. एक ह्रदय विदारक घटना में हुनकर हत्या क देल गेलेन. किछ नहीं फुड़ा रहल ऐछ. आहत छि. पता नहीं, एहेन नीक लोक के एतेक जल्दी भगवान् कोना शोर पारि ले छथिन्ह? कनिए दिन पहिलुका त बात छै, जे काली पूजा में लगभग २० बरस के बाद हुनका देखने छलहु, आ तखन जल्दिये एहेन दुखद समाचार भेटल, काल के क्रूर हाथ राम भाय के छीन ललक आ ढेरिक रास दुःख द देलक हमरा सब के आ हुनकर परिवार के. भगवान् शक्ति देथुन हुनका परिवार के एही कष्ट के सामना करय में.
बचपन से हम सब संगे संग पढैत रही. बचपने से विशेष मेहनती रहैथ. आर्थिक रूप से बेसी सक्षम नहियो रहलाक बाबजूद , अपन शिक्षा में बाधा नहीं बने देने छलखिन. अपन मेहनत के बल पर दसवीं कक्षा में चैनपुर उच्च विद्यालय में ७५ प्रतिशत से बेसी अंक आनि विद्यालय में दोसर स्थान प्राप्त केने छलाह. बाद में तेज नारायण बनैली कालेज भागलपुर से इंटर एवं स्नातक के परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण केने छलाह. बाद में बैंक के परीक्षा में सफल भ क बैंक में नौकरी केलैथ आ सम्प्रति ओ इलाहाबाद बैंक में मनेजर के पद पर छलैथ. एकटा बात आरो, राम भाय एहेन छलाह जे नेनो में नहीं याद ऐछ जे कहियो ककरो से झगड़ो केने हेताह.
राम भाय के हम विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करैत छि.
एखन हम एही से बेसी किछ नहीं लिखे के स्थिति में छि.
बचपन से हम सब संगे संग पढैत रही. बचपने से विशेष मेहनती रहैथ. आर्थिक रूप से बेसी सक्षम नहियो रहलाक बाबजूद , अपन शिक्षा में बाधा नहीं बने देने छलखिन. अपन मेहनत के बल पर दसवीं कक्षा में चैनपुर उच्च विद्यालय में ७५ प्रतिशत से बेसी अंक आनि विद्यालय में दोसर स्थान प्राप्त केने छलाह. बाद में तेज नारायण बनैली कालेज भागलपुर से इंटर एवं स्नातक के परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण केने छलाह. बाद में बैंक के परीक्षा में सफल भ क बैंक में नौकरी केलैथ आ सम्प्रति ओ इलाहाबाद बैंक में मनेजर के पद पर छलैथ. एकटा बात आरो, राम भाय एहेन छलाह जे नेनो में नहीं याद ऐछ जे कहियो ककरो से झगड़ो केने हेताह.
राम भाय के हम विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करैत छि.
एखन हम एही से बेसी किछ नहीं लिखे के स्थिति में छि.
Monday, August 19, 2013
रक्षा बन्धन
हाँ, त एक बेर फेर राखी के पावनि आबि गेल. भाय आ बहिन के अप्रतिम प्रेम के पावनि. किस्सा कहानी त ढेरिक रास छै एही पावनि के विषय में जे की इंद्र के इन्द्रानी बन्हने रहे राखी देवासुर संग्राम शुरू होई के समय में, कर्णावती हुमायूं के राखी भेजने छल अपन रक्षा करय के लेल इत्यादि-इत्यादि. मुदा सामान्यतया एही पावनि के भाय-बहिन के प्रेम के पावनि हि कहल जायत छै. एही में बहिन राखी बान्हि एक प्रकार के सूत्र बान्हि देत छै जे भाय के हर-समय हर क्षण रक्षा करैत रहत त दोसर दिस भाय सेहो सब समय में अपन बहिन के रक्षा करय के प्रण लेत छैथ.
इ पावनि हमरा सब बेर कने काल के लेल दुखी क देत ऐछ. अपन कियो सहोदर बहिन नहीं ऐछ हमरा. ओना ढेरों पितियौत, पिसियौत, संगी सबहक बहिन ऐछ, जे हमर राखि के सुख हर बेर पूरा क देत रहल ऐछ, मुदा मोन में कने कसक रही जायत ऐछ. हमर किछ मित्र के ढेरिक रास बहिन रहय आ जखन ओ सब भरि हाथ राखि बान्हि शान से निकलैत छल त हमरा इर्ष्या होइत छल, ओकरा सबहक भाग्य पर.
मोन के बोझिल होइत देखैत एक बेर सब भाय बहिन के राखी पावनि के बधाई प्रेषित करैत छि.
इ पावनि हमरा सब बेर कने काल के लेल दुखी क देत ऐछ. अपन कियो सहोदर बहिन नहीं ऐछ हमरा. ओना ढेरों पितियौत, पिसियौत, संगी सबहक बहिन ऐछ, जे हमर राखि के सुख हर बेर पूरा क देत रहल ऐछ, मुदा मोन में कने कसक रही जायत ऐछ. हमर किछ मित्र के ढेरिक रास बहिन रहय आ जखन ओ सब भरि हाथ राखि बान्हि शान से निकलैत छल त हमरा इर्ष्या होइत छल, ओकरा सबहक भाग्य पर.
मोन के बोझिल होइत देखैत एक बेर सब भाय बहिन के राखी पावनि के बधाई प्रेषित करैत छि.
Thursday, May 23, 2013
बाबा धाम
कुमोद भैया अपन बेटा के उपनयन करय के सोचलैथ आ विचार भेलैन जे बाबा धाम में इ यज्ञ कैल जाय. हमरो नोत भेटल. हमरा बड्ड प्रसन्नता भेटल जे शायद आब बाबा के बुलाबा आबि गेल ऐछ. गाम में कहल जायत छै जे जा धरि बाबा नहि बजेतौ ता धरि बाबा के नगरिया नहि जा सकब. एतेक ट1 के उमर में दू बेर देवघर जाय के मौका भेटल छल. पहिल बेर त हम लगभग १२ बरस के रही. ओही समय में हम अपन कक्का के संग दसहरा के समय में गेल रही. कने-कने याद ऐछ, मंदिर के गेट धरी गेल रही, मुदा पूजा नहीं क सकल रही, किये त बड्ड भीड रहैक. दोसर बेर कुनु परीक्षा देबय लेल गेल रही, ओही बेर एतेक समय नहीं छल वा इ कही जे समय नहीं निकाल सकलहु बाबा के पूजा के लेल. एही बेर त सोचि लेलहू जे इ मौका त हम नहि छोरब. बाबा के दर्शन त करबे करब. पूर्व एक्सप्रेस से विदा भेलहु आ फेर पहुँच गेलहु बाबा धाम. कुमोद भैया हमर सबहक आ अन्य आगंतुक सब के रहय के इंतज़ाम बाबा के मंदिर के लग में केने रहैथ. ठीक-ठाक आवास छल. अगिला दिन भोरे विचार भेल बाबा के पूजा करय के. स्नान केलहु आ एकटा गमछा लपेट के चललहू पूजा के लेल. मुदा इ की देखय छि, उमरल भीड, कतेक लोक, अथाह समुद्र जकाँ. संग में श्रीमती जी सेहो रहैथ, तें, हिम्मत आरो जबाब द देलक. बड्ड पैघ लाइने लागल छल आ उम्मीद नहीं छल जे आय फेर पूजा क सकब. पनडा सबहक सहयोग लेबाक कोशिस केलहु, मुदा सफलता नहीं भेटल. मोंन में हुए, जे एही ठाम आबि जेने से की हैत, बाबा के मर्जी हेते तखने ने पूजा क सकब. किछु लोक कहे जे जखन आबि गेलहु त पूजा त हेबे करते, बाबा सब नीके कर्थुन. विश्वासे नहीं हुए. बड्ड असमंजस में रही. कनेक काल के बाद कुमोद भैया के पंडितजी हि किछ व्यवस्था केलैथ आ कोहुना मंदिर में हमरा सब के ढूका देलैथ. मंदिर के भीतर त बड्ड अव्यवस्था. एतेक कम जगह में एक संग एतेक भीड. लोक पर लोक खसैय, सम्हारनाय मुश्किल. हमरा त एखनो भरोस नहीं छल. पूजा हैत की नहि , इ त दूर के गप, जां भाइयो जाय त निक्लब कोना. मुदा तखने एकटा रेला आयल आ हमरा सब के आगाँ ठेल देलक आ बुझायल जे कने जगह बनल. कहुना हिम्मत बान्ही कोशिस केलहु आ बाबा लग पहुन्च्लाहू आ जल चढेलाहू बाबा के. बुझा पडल जे कतेक बड़का युद्ध जीत लेलहू. मोन में संतोष सेहो भेल जे बाबा अर्जी सुनी लेलक.
एखन त कुनु ख़ास मौसम नहीं छल भीड के, मुदा तखन इ स्थिति छल. सोचे लग्लाहू जे भादव में जे अपन गाम सबहक लोक जायत छैथ बाबाधाम, ओ कोना पूजा करैत हेताह. ओतेक भीड़ में पूजा करने, कफ़न बान्हि युद्ध मैदान में जाय के बराबर ऐछ हमरा लेल. बूढ़ आ बच्चा सब के की हाल होयत हेते, सोचिये टा सकैत छि. देह सिहरी जायत ऐछ कल्पना क क. जां मंदिर के भीतर श्रद्धालु के नियंत्रित कायल जाय त समस्या के समाधान कयल जा सकैत ऐछ. एखन मंदिर के अन्दर कुनु नियंत्रण नहीं ऐछ. जे बलबत्तर, ओकरे राज. पंक्तियों में पाडा सब पाय ल क श्रद्धालु के लेल शोर्ट कट के प्रयास करैत ऐछ. पुलिस के व्यवस्था त ऐछ, मुदा क्रियान्वयन किछ नीक जकाँ भ सकैत ऐछ. भीड़ के नियंत्रण करय लेल पुलिस सोटा बर्साबैत ऐछ, श्रद्धालु पर. इ निक नहीं लागल. ओही क्षेत्र के लोक के त पता छै, मुदा बाहर के लोक के इ बर्दाश्त नहीं भ सकैत छै आ एही से रावणेश्वर बैद्यनाथ के कुव्यवस्था के ख़राब सन्देश जायत बहार के लोक में. झारखण्ड सर्कार जां एही अव्यवस्था के ठीक क लिए त बैद्यनाथ धाम आरो पर्यटक आ श्रद्धालु के आकर्षित क सकत.
दोसर बात, बैद्यनाथ धाम परिसर में त पंडा सबहक अखंड साम्राज्य बुझायत ऐछ. ते कुनु नियम कानून ख़ास प्रभावी नहीं भ रहल ऐछ. हर एक काज के लेल जे मोन से पैसा मंगेत ऐछ इ पंडा सब. एही से लोक सब के धार्मिक भावना निश्चित रूपें आहात होइत हैत. एही दिश झारखण्ड सरकार के ध्यान देबय पडत.
हम बाबा बासुकी नाथ के पूजा सेहो नीक जकाँ केलहु, ओही ठाम बाबा धाम एहेन भीड नहीं छल. मुदा ओही ठाम भी मंदिर के भीतर वैह हाल छल. अनियंत्रित.
ओना मोटा मोटी बाबाधाम के यात्रा निक रहल आ बाबा के अर्चना क क मोन प्रसन्ना भेल. बाबा वैद्यनाथ सब पर अपन कृपा बनने राखैथ. जय नील कंठ.
एखन त कुनु ख़ास मौसम नहीं छल भीड के, मुदा तखन इ स्थिति छल. सोचे लग्लाहू जे भादव में जे अपन गाम सबहक लोक जायत छैथ बाबाधाम, ओ कोना पूजा करैत हेताह. ओतेक भीड़ में पूजा करने, कफ़न बान्हि युद्ध मैदान में जाय के बराबर ऐछ हमरा लेल. बूढ़ आ बच्चा सब के की हाल होयत हेते, सोचिये टा सकैत छि. देह सिहरी जायत ऐछ कल्पना क क. जां मंदिर के भीतर श्रद्धालु के नियंत्रित कायल जाय त समस्या के समाधान कयल जा सकैत ऐछ. एखन मंदिर के अन्दर कुनु नियंत्रण नहीं ऐछ. जे बलबत्तर, ओकरे राज. पंक्तियों में पाडा सब पाय ल क श्रद्धालु के लेल शोर्ट कट के प्रयास करैत ऐछ. पुलिस के व्यवस्था त ऐछ, मुदा क्रियान्वयन किछ नीक जकाँ भ सकैत ऐछ. भीड़ के नियंत्रण करय लेल पुलिस सोटा बर्साबैत ऐछ, श्रद्धालु पर. इ निक नहीं लागल. ओही क्षेत्र के लोक के त पता छै, मुदा बाहर के लोक के इ बर्दाश्त नहीं भ सकैत छै आ एही से रावणेश्वर बैद्यनाथ के कुव्यवस्था के ख़राब सन्देश जायत बहार के लोक में. झारखण्ड सर्कार जां एही अव्यवस्था के ठीक क लिए त बैद्यनाथ धाम आरो पर्यटक आ श्रद्धालु के आकर्षित क सकत.
दोसर बात, बैद्यनाथ धाम परिसर में त पंडा सबहक अखंड साम्राज्य बुझायत ऐछ. ते कुनु नियम कानून ख़ास प्रभावी नहीं भ रहल ऐछ. हर एक काज के लेल जे मोन से पैसा मंगेत ऐछ इ पंडा सब. एही से लोक सब के धार्मिक भावना निश्चित रूपें आहात होइत हैत. एही दिश झारखण्ड सरकार के ध्यान देबय पडत.
हम बाबा बासुकी नाथ के पूजा सेहो नीक जकाँ केलहु, ओही ठाम बाबा धाम एहेन भीड नहीं छल. मुदा ओही ठाम भी मंदिर के भीतर वैह हाल छल. अनियंत्रित.
ओना मोटा मोटी बाबाधाम के यात्रा निक रहल आ बाबा के अर्चना क क मोन प्रसन्ना भेल. बाबा वैद्यनाथ सब पर अपन कृपा बनने राखैथ. जय नील कंठ.
Monday, April 15, 2013
याद (जुड़ शीतल/सिरुआ)
आय जुड़ शीतल माने सिरुआ पाबनि थिक. हमरा गाम में एकरा सिरुआ-विसुआ सेहो कहल जायत छै, पता नहीं किये. आस परोस के गाम में केवल सिरुआ ही कहै छै, ते ओ सब कने मजाको करय. बुझल रहैत छल जे सिरुआ छियई, मुदा जखने भिनसरे में माय या दादी ठंढा-ठंडा घैल के राखल जल माथा पर द दे, ते हम अकचका जायत रही. सामान्यतया हमर निन ओतेक जल्दी नहीं टुटैत रहै, तें हरबरा जायत रही. तखन बुझी जे ओह, आय ते सिरुआ रहै ने. बैसका पावनि रहै, भिनसरे बरी भात बनि जाय. माय कहे-जो-जो गाछी में पहिने गाछ सब के ज़ुरा के आबि जो. हमरा ते गाछी कम्मे छल मुदा जेह छल तकरो जुराबे लेल जायत रही. कमाल के सोच छल. सब लोक आय के दिन गाछी में गाछ-ब्रिच्छ के जुरबई लेल जायत छल.
एकटा बात आर, आय के दिन लोक सब गाम में घैला दान सेहो करैत छल. ओही घैला में भोर सांझ स्वच्छ जल भरल जायत छल, पुरे महिना. बैसाख के गर्मी में पानि दान के अलगे महत्व छै. तुलसी के पौधा में भी छोटका घैला या फुच्ची में एकट1 भूर क क ओही में कुश द क जल बूँद-बूँद खसय लेल देल जायत छल.
चैनपुर आ आसपास के गाम में शिकार खेलय के परंपरा सेहो छल. कतेक दिन पहिनहि से शिकारी सब अपन अस्त्र-शस्त्र सब पिजाबे लागैत रहे. गामक जंगल जेना बरदोखैर, कुरनमा, खैरबनी, इत्यादि इत्यादि जगह पर जाय शिकार करय लेल. शिकार करय जोग जानवर नहि छल ओहि समय में आ नहि ओहेन शिकारी, मुदा अपन अपन कुकुर के सन्ग ल क सब कोशिस करय जे कम से कम एकटा खरिहा के त शिकार भ जाय. खरिहा के मौस बड्ड स्वादिष्ट मानल जायत छल.
मिथिला में एहि दिन ढेरों जगह धुरखेल सेहो खेलल जायत ऐछ. हमरा पड़ोस में ऐछ एकटा गाम बघवा. ओही ठIम खुब मचा के धुरखेल होयत ऐछ एही दिन.
आब यादो नहीं ऐछ जे कतेक दिन पहिने माय जुरेने रहे सिरुआ के दिन. ओतेक दिन पहिने के जुड़ाबय के अहसास एखनो भ रहल ऐछ. परदेस में रहिके बाद त यादे क क अनुभव करय परैत छै. की करबे, बरी-भात खा लेलहू त मोन के बुझा देलहु जे भ गेल सिरुआ आ जुड़ शीतल..................
एकटा बात आर, आय के दिन लोक सब गाम में घैला दान सेहो करैत छल. ओही घैला में भोर सांझ स्वच्छ जल भरल जायत छल, पुरे महिना. बैसाख के गर्मी में पानि दान के अलगे महत्व छै. तुलसी के पौधा में भी छोटका घैला या फुच्ची में एकट1 भूर क क ओही में कुश द क जल बूँद-बूँद खसय लेल देल जायत छल.
चैनपुर आ आसपास के गाम में शिकार खेलय के परंपरा सेहो छल. कतेक दिन पहिनहि से शिकारी सब अपन अस्त्र-शस्त्र सब पिजाबे लागैत रहे. गामक जंगल जेना बरदोखैर, कुरनमा, खैरबनी, इत्यादि इत्यादि जगह पर जाय शिकार करय लेल. शिकार करय जोग जानवर नहि छल ओहि समय में आ नहि ओहेन शिकारी, मुदा अपन अपन कुकुर के सन्ग ल क सब कोशिस करय जे कम से कम एकटा खरिहा के त शिकार भ जाय. खरिहा के मौस बड्ड स्वादिष्ट मानल जायत छल.
मिथिला में एहि दिन ढेरों जगह धुरखेल सेहो खेलल जायत ऐछ. हमरा पड़ोस में ऐछ एकटा गाम बघवा. ओही ठIम खुब मचा के धुरखेल होयत ऐछ एही दिन.
आब यादो नहीं ऐछ जे कतेक दिन पहिने माय जुरेने रहे सिरुआ के दिन. ओतेक दिन पहिने के जुड़ाबय के अहसास एखनो भ रहल ऐछ. परदेस में रहिके बाद त यादे क क अनुभव करय परैत छै. की करबे, बरी-भात खा लेलहू त मोन के बुझा देलहु जे भ गेल सिरुआ आ जुड़ शीतल..................
Wednesday, April 10, 2013
चैनपुर स्वास्थ्य
मेला २०१३: अपन नजरि से.
पछिला साल जखन काली
माय के जन्म दिन अर्ध मैराथन के आयोजन भेल छल अपन गाम में तखने इ विचार बनल छल जे
आब चैनपुर फेसबुक ग्रुप किछ विशेष काज करत. ओहि आयोजन के दौरान उपस्थित डॉ विनोद
ठाकुर एवं डॉ नरेश झा सुझाव देलेथ जे आगा अपना सब मिलि के एक मेडिकल कैंप लगायब
जाहि में मरीज सब के लेल मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायल जायत. सैद्धांतिक रूप
से एही में सम्मति बनल आ फेसबुक ग्रुप डॉक्टर द्वय के आश्वस्त केलक जे एही आयोजन
के पूर्ण रूपें सफल बनाबय में इ ग्रुप अपन पूरा ताकत लगा देत. चूंकि इ प्रस्तावित
आयोजन पूर्णतः चिकित्सीय काबिलियत एवं ओकर निक जकां कार्यान्वयन पर निर्भर छल, तेन
डॉक्टर द्वय के अगुआई में इ कैंप आयोजन करय के निर्णय लेल गेल.
तारिख देल गेल ६ एवं
७ अप्रैल २०१३. ७ अप्रैल के स्वस्थ्य दिवस सेहो मनायल जायत ऐछ आ २०१३ स्वामी
विवेकानंद जी के १५०म जानती वर्ष सेहो छल, तें इ तय भेल जे ६ एवं ७ अप्रैल २०१३ के
स्वामी विवेकानंद के १५०म जयंती वर्ष के उपलक्ष में ‘चैनपुर स्वास्थ्य मेला २०१३’
के आयोजन शशिकला मध्य विद्यालय एवं उच्च विद्यालय चैनपुर (सहरसा) के परिसर में कायल
जायत.
एही मेला के ब्लू
प्रिंट तैयार कैल जा लागल. पहिने आस पास के किछ गाम के एही आयोजन में शामिल कराय
के विचार छल आ इ लक्ष्य छल जे लगभग १००० से २००० मरीज के मुफ्त चिकित्सकीय परामर्श
एवं दवाई देल जायत. बाद में इ निश्चय भेल जे एही में सहरसा जिला के बेसी से बेसी
गाम के शामिल कयल जाय. स्पष्ट छल जे आयोजन के स्तर बढ़ी गेल आ एही लेल समुचित डॉक्टर
एवं दवाई इत्यादि के इंतज़ाम होमय लागल. लगभग ३०-३५ डॉक्टर के आमंत्रित कैल गेल छल
आ लगभग ३० गोटे अपन मंजूरी देलैथ. एही गाम के डॉक्टर द्वय के आलबा दुनु गोटे के
पुत्र आयुष्मान प्रशांत एवं तुषार सेहो एही कैंप के दौरान रहैथ. गाम के एक अन्य
युवा डॉक्टर रहैथ ; भवेश. एकर आलावा, सहरसा, दिल्ली, कटिहार, धनबाद, पटना इत्यादि जगह
से डॉक्टर अपन संस्तुति देलैथ. दवाई आ अन्य चिकिसकीय जांच सम्बन्धि सुविधा सबहक
व्यवस्था डॉक्टर द्वय मिलि के केलैथ. स्वस्थ्य विभाग सहरसा के सहयोग भी बहुत प्रशंशनीय
रहल.
जखन इ निश्चय भ गेल
जे इ मेला त आब हेबे करत, तैयारी शुरू भ गेल, दुनु डॉक्टर साहेब के दिश से भी आ
फेसबुक ग्रुप चैनपुर के दिश से भी. लीफलेट दिल्ली में ही छपि गेल आ गाम पहुँच गेल.
सौंसे गाम में आर आसपास के गाम में परचा सटय लागल. लोक में उतुस्कता जागे लागल. इ
काजे तेहने छल, किएक त एकर बेगरता त सबके होयत छै. गाम में दीप नारायण अपन टीम के
संग लागि गेलाह जोर शोर से. मरीज के रजिस्ट्रेशन शुरू भ गेल. रजिस्ट्रेशन के
काउंटर छल; राजकुमार झा जी के दूकान.
मार्च के तेसर सप्ताह में गर्माहट आबे लागल तैयारी में. फेसबुक
ग्रुप के सबसे उत्साही आ उर्जावान युवक अगम बाबु (जे दिल्ली में ही नौकरी करैत
छैथ), गाम पहुँच गेलाह, एही आयोजन के तैयारी के गति देबय लेल. गाम में कुमुदनंद
सेहो छल. रितेश सेहो ककरो से कम नहीं. गामे गाम प्रचार कराय में लागी गेल दीपू
बाबु, अगम बाबु, बौवा(कुमुदनंद), आ रीतेश. किशोर ठाकुर, जे एही ग्रुप के सबसे
डायनामिक सदस्य ऐछ, अपन उपस्थिति दर्ज करा
देलखिन ३१ मार्च के ही आ जमि के लोजिस्टिक्स आ स्ट्रेटेजी सम्बन्धी काज के
सम्हार लैथ. आस पास के ३० गाम में प्रचार भेल आ लगभग ४००० मरीज के निबंधन भेल.
निबंधन करबे के मुख्य उद्देश्य छल इ पता लगाने जे मरीज के प्रोफाइल की रहत आ हुनका
सब लेल निक व्यवस्था भ सके. तें एही निबंधन से मरीज के इलाज से नहीं जोरल गेल आ इ
सुविधा देल गेल जे मेला दिन आबी मरीज अपन निबंधन करबैत आ इलाज के सुविधा लैथ. एही
आयोजन में सहयोगी आ स्वयंसेवक के कुनु कमी नहीं छल, मुदा सबहक नाम गिनायब मुश्किल.
खैर, इ सेहो निश्चय
भेल जे एही मेला के उद्घाटन के लेल बिहार के स्वस्थ्य मंत्री के आमंत्रित कैल जाय.
सौभाग्य से डॉ नरेश के प्रयास से मंत्री जी मानि गेलाह. मंत्री जी के संस्तुति के
बाद त मेला के रूप बदलि गेल. आयोजन के भव्य से भव्य करबाक कोशिस हुए लागल. पूरा
जिला प्रशासन एही आयोजन के अविस्मरनीय बनाबाई में लागी गेल. जिलाधीश, कमिश्नर,
सिविल सर्जन, इत्यादि सब बढ़ी चढ़ी के भाग लेलेथ. स्थानीय विधायक श्री अलोक रंजन
सेहो अपन उपस्थिति के मंजूरी देल्खिंह.
गाम के सब युवक सब
लागि के ५ अप्रैल के २ बजे रात के सब तैयारी पूर्ण क लेलेथ. इ युवा सब दिन के दिन
नहीं आ राति के राति नहीं बुझ्लैथ. अगिला भोर सब के सपना पूरा होई के दिन छल. एतेक
दिन के मेहनत के फल देखे लेल सब बौला छल.
कैंप के शुरुआत के
समय देल गेल- ९ बजे. मंत्री जी के आबे के समय बदली गेल. पहिने त इ प्रोग्राम छल जे
मंत्री जी उद्घाटन करताह आ तखन इलाज शुरू होयत, मुदा समय बदलि जेबाक कारणे, कैंप
के शुरुआत निश्चित समय पर ही रखल गेल. शशिकला विद्यालय में क्लिनिक बनाओल गेल छल आ
उच्च विद्यालय में दवाई वितरण केंद्र. भोरे से मरीज के भीर बढे लागल. सहरसा जिला
के सब कोण से मरीज एलाह. हम सब बड्ड उत्साहित रही. भोरे से उज्जर टी-शर्ट में वालंटियर अपन-२ निर्धारित काज में लागि
गेलाह. बिना कुनु विशेष योग्यता के बाबजूद इ वालंटियर सब बड्ड उल्लेखनीय काज
केलैथ.
इ पता लागल जे
मंत्री जी ३ बजे सहरसा पहुन्च्ताह. गाम के आ आयोजन के प्रतिनिधि के रूप में गोपाल
कृष्णा ठाकुर, किशोर ठाकुर एवं हम एयर पोर्ट गेलहु मंत्री जी के स्वागत करय के
लेल.
लगभग ३.३० बजे
मंत्री जी गाम पहुँचलाह. नीलकंठ मंदिर में पूजा अर्चना केलैथ. स्टेज उच्च विद्यालय
के प्रांगन में बनल छल. सब अतिथि के मंच पर यथास्थान जगह देल गेलैंह. हमर सबहक
प्रिय श्री गोपाल कृष्णा ठाकुर मंच सम्हारलैथ. मिथिला के परंपरा के अनुसार सब
अतिथि के चद्दर आ पाग पहिरा के स्वागत कैल गेलैंह. स्वागत भाषण के बाद पंडित
मधुकांत झा ‘मधुकर’ के मंगलाचरण के बाद गाम के बच्ची सब स्वागत गान प्रस्तुत केलक.
स्वागत गान लिखने रहैथ श्री मनोज कुमार ठाकुर जी. बड्ड नीक रचना. भाव आ शब्द के
एहेन संयोजन बड्ड कम लखा परैतत ऐछ आय-काल्हि. तत्पश्चात डॉ नरेश संबोधित केलैथ आ गाम के लेल
मंत्री जी से किछ अनुरोध सेहो. मंत्री जी करीब १०-१५ मिनट भाषण देलैथ. अंत में ओ
गाम के स्वास्थ्य उपकेन्द्र के उत्क्रमित क क अतिरिक्त स्वस्थ्य केंद्र में
परिवर्तित करय के आश्वासन देलैथ. अंत में मंत्री जी कहलैथ , जखन काज भ जायत त फेरो
आयब चैनपुर आ तखन तिलकोर के तरुआ खायब. बड्ड निक रहल मंत्री जी के वक्तव्य. एकर
उपरांत मंत्री जी विदा लेलाह.
गाम के मिलन मंदिर
(सामुदायिक भवन/पंचायत भवन) जे बहुत दिन से उपयोग में नहीं लेल जा रहल छल,
प्रशासनिक सहयोग से सीनियर सिटीजन क्लब के रूप में बदलल गेल. एही क्लब में विभिन्न
प्रकार के मनोरंजक एवं ज्ञानवर्धक सामग्री सब रहत आ अपन सीनियर सिटिजन सब के अनुभव के हम सब निक जकां उपयोग क सकब. एही
क्लब में नियमित अंतराल पर योग के क्लास भी चलायल जायत.
मरीज के संख्या बढ़ले
जायत छल. एहेन भीड त कहियो नहीं देखने रही कुनु गाम में. काली पूजा में एतेक लोक
गाम नहीं आबैत हैत कहियो. आस परोस के गाम में चैनपुर के प्रशंशा होमय लागल. सांझ
धरी २००० मरीज के परामर्श द देल गेल छल. सामान्यतया मरीज सब व्यवस्था से संतुष्ट
छल.
७ तारीख के त आरो
भीड. बुझबे जे सम्हारत की नहि. मुदा बाबा नीलकंठ के एही धरती पर पार लागि गेल.
मरीज के छोर खत्मे नहि हुए. अंत में ९ बजे राति धरी डॉ सब इलाज में लागल रहलाह. आ
इ मेला सफल मानल गेल.
एहेन आयोजन में किछ
नहीं किछ त्रुटी त रहिये जायत ऐछ, जकरा पर ध्यान द क भविष्य में कमी दूर कायल जा सकैत ऐछ.
डाक्टर, वालंटियर
इत्यादि के भोजन जलपान के व्यवस्था डॉ बिनोद स्वयं केने रहैथ.
एही आयोजन के सफल
बनाबय में सबसे बेसी सहयोग रहल; गाम के लोक सबहक अप्रत्याशित समर्थन. युवा वर्ग के
अप्रतिम सहयोग. ओना सब गोटे के नाम हम नहीं जनित छि, तैयो हम किछ लोक के नाम लिखी
रहल छि जिनका सक्रिय सहयोग के बिना एही मेला के सफलता के कल्पना नहीं कैल जा सकैत
छल.
डॉ. नरेश झा, डॉ.
बिनोद कुमार ठाकुर
किशोर ठाकुर, अगम,
दीप नारायण, बौवा, रितेश, राजू, बची बाबु, पंकज, नितीश, राघवेन्द्र, अमित, नमन, सुशिल
ठाकुर ‘ढनढन’ सुधांशु ठाकुर, निरंजन ठाकुर, गोपाल कृष्णा ठाकुर, मुन्ना मिश्र, कंदर्प किशोर (फोटो अपलोड करय में तीव्र)
इत्यादि इत्यादि.................
हम सब गोटे के नाम
लिखे में असमर्थ छि, मुदा जतेक भी सहयोगी रहैथ सब धन्यवाद के पात्र छि. एहेन
मानवीय कार्य में अहाँ सब अपन सहभागिता देलियाई, बाबा नीलकंठ के कृपा हरदम बनल रहत
अहाँ सब पर.
Monday, December 10, 2012
चैनपुर में मैराथन
कतेक दिन भ गेल, एहि ब्लॉग पर नहि आबि सकलहु आ ते नहि किछ लिख सकलहु। कतेक रास बात रहि गेल शेयर करय लेल। गाम के फेसबुक समूह के सब सदस्य मिलि के प्रयास केलहु जे गाम के विकास में हम सब भागिदार बनी। अपन भागीदारी गाम स बाहरो रहहि के तय करी। कोना प्रयास कैल जाय, कुन-कुन मुद्दा उठायल जाय, ओही लक्ष्य के कोना प्राप्त करी, इत्यादि विषय सब पर सक्रिय सदस्य के बीच में बड्ड विमर्श भेल आ मंथन सेहो। इः सब मंथन के बीच में इ भेल जे गाम में जागरूकता फैलाबइ लेल किछ इवेंट के आयोजन कैल जाय। कोना आ कुन इवेंट? समूह के नौजवान सदस्य सब विचार रराख्लाथि जे पुरे दुनिया में जागरूकता बढेबा लेल मैराथन के आयोजन कैल जायत अछि। गाम के लोक सब एही में भाग लेत आ जागरूकता पसरे लागत समूह के विचार भेल जे काली पूजा, जे अपना गाम के मुख्य पर्व छि, के अवसर पर इ इवेंट कैल जाय आ बहुत विमर्श के बाद इ तय भेल जे काली माय के जन्म दिन 13 नवम्बर 2012 के कैल जाय। किछ आशंका भी जतायल गेल जे एही अवसर पर इ आयोजन ठीक नहि रहत, लोक सब भाग नहि ल सकत इत्यादि, इत्यादि। मुदा इ तय भेल जे कुनु तिथि के सब के उपस्थिति निश्चित नहीं कैल जा सकैत अछि, ते, जन्म दिन सब से उपयुक्त मानल गेल।
तारीख त तय भ गेल, आब इ कोना कैल जाय, एही पर मंथन होमय लागल। समूह के बेसी सदस्य गाम से बाहरे रहैत छथि । बेसी छुट्टी ल क किनको लेल गाम जायब मुश्किल छल। चूंकी शुरूआती दौर में गाम से बेसी सहयोग के उम्मीद नहि छल आ सत कहू ते उदासीनता बेसी छल, इ काज मुश्किल बुझायत छल। गाम में कार्यकर्ता के रूप में एकता दीपू बाबु . चूंकि हुनकर अपन राजनितिक आकांक्षा सेहो छन्हि , ते किछ-किछ कोण से हुनकर काज के शंका के दृष्टि से सेहो देखल जायत छलन्हि। कहीं इ एकर उपयोग ते राजनीती में त नहीं करत? बहुतो प्रयास के बादो, गाम में एही आयोजन के लेल सही माहोल नहीं बुझायत छल। एहनो बुझायत छल जे केवल ग्रुप के सदस्याए भरी एही आयोजन में ठाढ़ रहत आ एही आयोजन से हमरा सब के किछु नहीं भेटत। लोजिस्टिक्स सब सोचल जाय लागल। अमित (गोपाल), किशोर, निरंजन, सनत, अगम इत्यादि सब मिलि के योजना बनाबे लागल। सबसे पहिने आयोजन स्थल के फैसला कैल गेल। पहिने जे प्रोग्राम नवकि काली मंदिर के प्रांगन में होई वाला छल, इ तय भेल जे शशिकला मध्य विद्यालय में कैल जाय जाहि से की काली पूजा के आयोजन में कोनो बाधा नहि हो। कलेक्टर, SDO, थाना, CMO इत्यादि के आमंत्रण भेजल गेल जे ओ एही आयोजन के अपन उपस्थिति से कृतार्थ करैत। सहरसा जिला के सब प्रमुख गाम में एकर प्रचार कैल गेल। अमित पम्पलेट आ बैनर, लीफलेट इत्यादि के व्यवस्था पटना से ही केलैथ । किशोर दौर में देबय जाय वाला ट्राफी के व्यवस्था खुद केलैथ आ बिना आरक्षण के चलि देलाह गाम में होई वाला एही आयोजन के गति देबय लेल। अपना हाथ से ठेला घीच के किशोर, निरंजन, दीपू, बच्चन जी-------------- पुरे गाम में जमि के प्रचार केलैथ , टोले टोल, गली गली घूमि के प्रचार केलैथ आ लोक सब के आश्वस्त करय के भरिसक प्रयास केलैथ एही आयोजन के बारे में। संतोष ठाकुर 'ज्योतिषी जी', डॉ विनोद भाय जी, आदरणीय मुखिया जी भी एहि आयोजन में भाग लेलैथ आ अपन सम्मति देल्खिंह। लोकतंत्र में जन प्रतिनिधि के सहयोग आवश्यक मानल जायत अछि। इवेंट के दिन आबैत आबैत गाम में माहौल बना देलैथ , आ लोक सब आशा भरल नजर से देखे लागल एही इवेंट के आयोजन के।
फेर आयल, डी डे, कलेक्टर साहब आ SDO साहब मुख्या अतिथि के रूप में शोभा बढ़ेल्खिं। मुखिया जी उपस्थित रहैथ । सरपंच साहब कतहु नहीं लखा पडलाह । मैराथन में भाग ले वाला के भीर लागी गेल। लगभग 400 धावक कोशी कमिश्नरी के विभिन्न गाम से आयल। ज्योतिषी जी अपन स्वागत गान से भीर के मन मोहि लेलखिन। मुखिया जी अपना भाषण से सेहो बड्ड प्रभावित केलैथ , कलेक्टर साहब दीप जला आ फीता काटी दौर के शुभारम्भ केलैथ । किशोर जे एही टीम के सबसे सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में उभर्लाह, अपन ओजस्वी वक्तव्य से सब के प्रभावित केलाह। निरंजन जी, सनत आ दीपू सेहो अपन अपन संबोधन में एही दौड़ के उद्देश्य आ लक्ष्य से लोक सब के अवगत करेल्खिं।
दौर बड्ड नी क जकां संपन्न भेल। पुरस्कार के वितरण भेल आ इ आयोजन के सब तरहे सफल मानल गेल।
मुदा, की इ दौड़ छल की किछ आर। मूल उद्देश्य दौड़ नहीं छल, इ त एकटा माध्यम छल जकर सहारा से हम सब गाम के विकास के लक्ष्य प्राप्त करय लेल चाहैत छि। हमरा सब के लक्ष्य ध्यान में रखबाक चाही, हर समय।
ग्रामीण के उदासीनता से ग्रुप के जोश में ठंडक आबि गेल। कारण जमीनी स्तर पर काज कराय वाला के अभाव। एकटा दीपू की करत? समाधान अपन सहयोग देबय लेल तैयार अछि। अपना सब के एही विषय में एक बेर फेर विचार कराय परत। किशोर समाधान से बात कराय के कोशिस क रहल छथि ।
एही बीच में एकटा आर गप भेल छल, SDO साहब किशोर आ निरंजन जी के किछ काज के लेल जेना ग्रामीण स्तर से सहयोग के लेल कहलखिन, विभिन्न सामजिक सुरक्षा योजना के कार्यान्वयन के लेल। एही में समाधान से मदति भेट सकैत अछि।
एही कड़ी में डॉ विनोद भ।य जी एकटा मेडिकल कैंप के विषय में प्रस्ताव देने छथि , 30-31 मार्च के। फगुआ के बाद, इ कैंप ठीक रहत। मुदा ग्रुप के सदस्य एही में कोना योगदान करत? सब बूते त मुश्किल होयत गाम में रहनाय , मुदा जिनका संभव हुए ओ अवश्य रही आ एकरा सफल बनाबी।
इ ग्रुप जत्ते मुद्दा के उठा रहल अछि आ जतेक पर विमर्श क रहल अछि, ओकरा कोना लागू कैल जाय, एही में मतैक्य नहि बनि रहल अछि। अपन सबहक सीमा के देखैत हमरा सब के मिलि के कोशिश कराय परत जाहि से की अपन जन्मभूमि के किछ बेहतर बना सकब।
एक बेर भोला बाबा से निवेदन करब जे हाउ भोला बाबा, अपन धिया पुता सब के एतेक शक्ति दाहक जे ओ सब किछ काज क सके अपन गाम के लेल, नीलकंठ धाम के लेल।
जय नीलकंठ।
Sunday, September 16, 2012
एक दर्द
चैनपुर, सहरसा जिला का एक गाँव जो सदा से अपने बुद्धिजीवियों, विद्वानों एवं पंडितों के लिए मशहूर रहा है, आज लगता है की यहाँ की शिक्षा व्यवस्था लगभग चरमरा गयी है. २०० से भी ज्यादा इंजीनियरों को पैदा करने वाला यह गाँव, सैकड़ों शिक्षकों का दंभ भरने वाला यह गाँव अचानक कैसे शिक्षा के मामले में एकदम उतार की ओर जाने लगा है, यह समझ से परे है. जैसा की विदित है की शिक्षा हमारे जीवन का मूल आधार है एवं इसी के बलबूते इस गाँव ने अपना इतना नाम किया है वहां की शिक्षा व्यवस्था ऐसे बिगड़ने लगेगी समझ में नहीं आती. जहाँ तक मेरा मानना है इसके मूल में ग्रामीणों की उदासीनता ही है. पहले के समय में गाँव के सभी बच्चे लगभग गाँव में शिक्षा प्राप्त करते थे, चाहे उनके अभिभावक गाँव से बाहर ही क्यों न हो. आज कल जो भी आजीविका के लिए गाँव से बाहर हैं उन सब के बच्चे अब बाहर ही रहते है. गाँव में केवल वे ही रह गए हैं जो बाहर नहीं जा प् रहे हैं. यहाँ तक की जो गाँव के आस पास भी नौकरी कर रहे हैं वे भी अपने बच्चे को नजदीक के शहर में पढाते है. इस प्रकार गाँव में शिक्षण का वातावरण कैसा है, उन लोगों के चिंता का कारन कभी नहीं बनता है. रहे गाँव के वो लोग जो अपने बच्चे को बाहर पढ़ाने में असमर्थ हैं, वो समझते हैं की हम क्या कर सकते हैं, जो नसीब में होगा वही होगा. पंचायत प्रतिनिधि भी उदासीन है. लगता है उन्हें कुछ लेना देना नहीं है इस मामले से. उन्हें तो केवल अपना स्वार्थ साधना है और यह स्वार्थ तभी साध सकता है जब आम लोग शिक्षा से दूर रहे. ऐसी स्थिति में आम जनता क्या करे? कहाँ जाए? क्या इसी तरह गाँव और देश के भविष्य को डूबने दिया जाय. क्या केवल अनिवासी चैन्पुरियों के दम पर ही हम दिखाते रहे की हम कितने प्रबुद्ध हैं?
अनिवासी चैन्पुरिये तो लगभग उदासीन है. वो कहते है अब इस गाँव का कुछ नहीं हो सकता है. ना हमलोग अब गाँव ज कर रह सकते है और न ही बच्चे. केवल पिकनिक मनाने के लिए साल में एक आध बार गाँव चले जाते हैं. बच्चे तो पता नहीं इसे अपना गाँव समझते भी हैं की नहीं. वो इसे बाबा का गाँव या नाना का गाँव समझते हैं. ऐसे में अनिवासी चैनपुर वाले से कुछ अपेक्षा करना लाजिमी नहीं होगा. फिर कौन करेगा, स्पष्ट है की गाँव के लोगों को ही आगे बढ़ना होगा.
अभी चैनपुर के स्कूलों में गाँव के ही ज्यादा शिक्षक हैं. एक आध को छोड़कर किसी को पढ़ने -पढ़ाने में रूचि नहीं है. पता नहीं ये अपने जिम्मेदारी से क्यों भाग रहे हैं. जिसके लिए उन्हें वेतन मिलता है उस एक काम को भी वे ठीक से नहीं करना चाहते है. येही स्थिति सभी स्कूलों की है. कुछ निजी विद्यालय भी चलते हैं. ये विद्यालय कम कोचिंग संस्था ज्यादा है. कहने के लिए तो ये बच्चों को गुणवत्ता भरी शिक्षा देना चाहते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है. एक तरफ बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं जाते हैं, जिससे उनमे अनुशासन हीनता आती है दूसरी और उन्हें स्कूल के महत्व का पता नहीं चलता है. यह सही है की हमारे सरकारी स्कूल अपने पूरी क्षमता से सही शिक्षा नै प्रदान कर पा रही है, लेकिन ग्रामीण का जो सहयोग और प्रतिबद्धता चाहिए वह भी नहीं है.
इन सब नकारात्मक बातों के बाबजूद एक चीज तो है जो हमें उत्साहित करती है वह है लड़कियों की शिक्षा के प्रति उत्साह और लड़कियों का झुकाव. यह एक सही लक्षण है. हमें अपने बेटियों एवं बहनों को इसके लिए लगातार प्रोत्साहित करना होगा. बिहार सरकार भी इस और अच्छा प्रयास कर रही है.
ग्रामीणों से यह अनुरोध है की वे इस और पर्याप्त ध्यान दें, क्योंकि उचित शिक्षा ही हमारा भविष्य का सही तरीके से निर्माण कर सकती है.
एक अनुरोध अनिवासी चैन्पुरियों से भी, कृपा कर अपने गाँव पर भी ध्यान दे. ये हमारी जननी है, इसका ख्याल हम नहीं रखेंगे तो कौन रखेगा. ऐसी कोई योजना बनाये जिससे गाँव की चहुंमुखी समृद्धि हो और इस तरह अपनी जननी के दूध और मिटटी का कर्ज कुछ हद तक मिटा सके. क्योंकि कर्ज मिटाना तो किसी के बस में नहीं है. हे अनिवासी चैनपुरवासी, अपनी मिटटी तुम्हे याद कर रही है. थोडा कष्ट तो होगा, क्योंकि यहाँ न तो पर्याप्त बिजली है, न ही और तमाम सुविधाएँ ही है.
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